छात्रों में शिक्षा की रूचि बढ़ाने के तरीके - वर्तमान समय में नई शिक्षा प्रणाली की वजह से शिक्षा के क्षेत्र में कई तरह के बदलाव हुए हैं। भारत में सबसे अधिक महत्व ऑनलाइन पढ़ाई को ही दिया जा रहा है लेकिन क्लास के अंदर की गई पढ़ाई सबसे अच्छी मानी जाती है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है तथा स्कूलों में लैपटॉप तथा कंप्यूटर की भी व्यवस्था की जा रही है। 

भारत में नई शिक्षा प्रणाली की वजह से शिक्षक छात्रों की पढ़ाई पर भी अधिक महत्व दे रहे हैं लेकिन नई तकनीकी पुराने शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही है। प्राइवेट स्कूलों के अध्यापक छात्रों को बेहतर पढ़ाई देने के लिए उन्हें शिक्षा के नए नियमों से पढ़ा रहे हैं। ताकि छात्रों को शिक्षा की नई नीतियों की वजह से परेशानी ना हो। कई अध्यापक पढ़ाई के तरीकों में बदलाव कर रहे हैं ताकि छात्रों को आसानी से सरल शिक्षा उपलब्ध हो सके। शिक्षा के तरीकों में बदलाव करने की वजह से छात्रों में भी पढ़ाई की रुचि बढ़ेगी। 

छात्रों में शिक्षा की रूचि बढ़ाने के लिए इन तरकीबों का इस्तेमाल करें - 

शिक्षक की जगह छात्रों के द्वारा सवाल पूछना - हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि कई छात्र ऐसे होते हैं जो सवाल के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन बताने से डरते हैं। ऐसे में अगर सवाल अध्यापक की जगह पास में बैठे सहयोगी छात्र के द्वारा पूछा जाए तो बेहतर होगा, क्योंकि ऐसा करने से छात्र का डर भी दूर होता है तथा वह अपने सहयोगी को सवाल का उत्तर आसानी से बता सकता है। 

अगर कोई छात्र अपने सहयोगी को भी क्लास के अंदर सवाल का सही उत्तर नहीं बताता है तो उसे डराने की बजाय उसकी हिम्मत बढ़ाएं तथा उसे अगले दिन के लिए तैयारी करने के लिए कहें। ऐसा करने से छात्र अगले दिन पढ़ाई पर ध्यान देकर बेहतर तरीके से तैयारी करेगा। 

छात्रों को एकजुट करने की कोशिश करें - अध्यापक हमेशा छात्रों को समूह के साथ पढ़ाई करने की सलाह दे। क्लास के अंदर पढ़ाई में होशियार लड़कों के साथ कमजोर लड़कों का ग्रुप बनाएं। ताकि पढ़ाई में कमजोर बच्चे भी होशियार लड़कों से कुछ सीख सके। कक्षा के अंदर कम से कम चार-पांच ग्रुप बनाए और उन सभी छात्रों को एक ही विषय के अलग-अलग टॉपिक पढ़ाई करने के लिए दें। 

ऐसा करने से छात्रों के बीच मिलकर पढ़ाई करने की क्षमता विकसित होगी तथा सभी छात्र उस विषय के टॉपिक को अच्छी तरह से पढ़ेंगे। क्योंकि कई लड़के ऐसे होते हैं जो पढ़ाई में होशियार लड़कों से पूछने में बहुत डरते हैं लेकिन इस तरह के ग्रुप बनने के बाद उन्हें होशियार लड़कों से सवाल पूछने में आसानी होगी। 

पढ़ने के बाद रिफ्रेश होने के लिए मौका दे - कई अध्यापक ऐसे होते हैं जो सवाल समझाने के तुरंत बाद ही छात्रों से सवालों के उत्तर के बारे में पूछने लगते हैं जबकि ऐसा करना बिल्कुल गलत है। छात्रों को पढ़ाने के बाद कम से कम 10 मिनट का ब्रेक जरूर दें। इस 10 मिनट के ब्रेक में छात्र पूरी तरह से रिफ्रेश हो जाता है जिसकी वजह से उन्हें पढ़ाई से ऊब नहीं होती है। 

आप सभी ने देखा होगा की स्कूलों में प्रत्येक टीचर की कक्षा का समय लगभग 45 मिनट का होता है और उसके बाद पांच-दस मिनट का ब्रेक होता है। यह समय इसलिए ही होता है ताकि छात्र 45 मिनट के बाद 5-10 मिनट का ब्रेक ले सके। 

दैनिक जीवन में उपयोग करने वाले उदाहरण - अध्यापक हमेशा छात्रों को पढ़ाते समय सवालों को समझाते समय ऐसी चीजों का उदाहरण दें जिनका दैनिक जीवन में उपयोग करते हो। इस प्रकार के उदाहरण देने से छात्र उस सवाल को काफी लंबे समय तक याद रख सकते हैं। कक्षा 10 तक गणित तथा विज्ञान को ही सबसे अधिक कठिन माना जाता है। इसलिए विज्ञान के अध्यापक सवालों के माध्यम से छात्रों से प्रैक्टिकल करवाएं ताकि भी खुद कुछ नया सीख सकें। 

कक्षा के अंदर अध्यापक का छात्रों के साथ दोस्त के तौर पर व्यवहार करना सबसे अच्छा माना जाता है। क्लास के अंदर अध्यापक सवालों के साथ अलग-अलग तरह की प्रैक्टिकल करवाएं ताकि छात्रों को बेहतर ढंग से समझने के लिए परेशानी ना हो।

छात्रों को सोचने का समय दें - कई अध्यापक ऐसे होते हैं जो बच्चों से सवाल करते समय उन्हें बहुत जल्दबाजी होती है जिसकी वजह से बच्चे को सोचने का समय भी नहीं मिल पाता है। इसी कारण छात्र सवाल का उत्तर जानते हुए भी उसके बारे में कुछ भी बता नहीं पाते है। इसलिए छात्र से सवाल करने के बाद कम से कम उसे एक-दो मिनट का सोचने का समय जरूर दें। 

पढ़ाई में कमजोर छात्रों के लिए यह बिल्कुल सही होगा क्योंकि ऐसे छात्रों को सवाल के उत्तर तुरंत याद नहीं रहते हैं। इसलिए उन्हें सोचने का समय मिलने से सवाल के उत्तर को आसानी से तलाश सकते हैं। पढ़ाई में कमजोर छात्र सोचने का समय मिलने की वजह से अपने विचारों को आसानी से ढूंढ सकते हैं तथा अध्यापक को सवाल का सही उत्तर बता सकते हैं।  

पढ़ाई के बारे में जानने के लिए प्रत्येक सप्ताह में टेस्ट लेना - प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी हर सप्ताह के बाद छात्रों की पढ़ाई जांचने के लिए टेस्ट लेने चाहिए। हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि प्राइवेट स्कूलों में हर सप्ताह के बाद छात्रों की पढ़ाई के बारे में जानने के लिए टेस्ट लिए जाते हैं जबकि सरकारी स्कूलों में ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। इसलिए सरकारी स्कूलों में भी छात्रों की शिक्षा के बारे में जानने के लिए प्रत्येक सप्ताह में टेस्ट लेने चाहिए। 

प्रत्येक सप्ताह में टेस्ट लेने की एक कॉपी अध्यापक छात्रों के माता-पिता को जरूर दिखाएं ताकि उन्हें भी छात्र की पढ़ाई के बारे में पता चल सके। इसके बाद छात्र के माता-पिता घर पर भी बच्चे की पढ़ाई पर पूरा ध्यान देंगे। इस तरह से अध्यापक छात्रों में शिक्षा की रूचि को आसानी से बढ़ा सकते हैं। 

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