वर्तमान समय में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को मोबाइल दिलाना सही है या गलत - दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे ऑनलाइन पढ़ाई और वर्तमान समय को देखते हुए अपने बच्चों को मोबाइल दिलाना सही है या गलत। वर्तमान समय में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ ऑनलाइन शिक्षा को भी अधिक महत्व दिया जाता है। आजकल कंपटीशन की तैयारी करने वाले कई ऐसे युवा है जो ऑनलाइन क्लास के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 

वर्तमान समय में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को मोबाइल दिलाना सही है या गलत -

एक नजर से देखे तो ऑनलाइन शिक्षा हमारे बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद है। स्कूल के शिक्षक खत्म होने के बाद भी हम अपने बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई जारी रख सकते हैं। इस बात को हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई के लिए लैपटॉप या मोबाइल की जरूरत पड़ती है लेकिन क्या हमारे बच्चों को मोबाइल दिलाना सही है या गलत। मोबाइल खरीदने के बाद हकीकत में हमारे बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं या कुछ और, इन सब के बारे में यहां पर विस्तार से लिखा गया है।

आज के समय में शहरी क्षेत्र के अधिकतर बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई ही करते हैं। अगर वैसे देखें तो भारत में सभी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग क्लासेज यानी सभी जगह पर ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था के जरिए ही बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिन बच्चों के माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं है क्या उनके बच्चे हकीकत में मोबाइल से पढ़ाई कर रहे हैं? वैसे तो कई ऐसे बच्चे हैं जो पढ़ाई का बहाना करके नया मोबाइल खरीद लेते हैं जबकि उसका उपयोग पब्जी, फ्री फायर और कई सोशल मीडिया एप्लीकेशन पर करते हैं।

इस बात को हम सब अच्छी तरह से जानते हैं कि जब से पब्जी और फ्री फायर जैसे गेम प्ले स्टोर पर उपलब्ध हुए हैं तब से ही बच्चों ने अपनी पढ़ाई से बिल्कुल दूर हो चुके हैं। कई ऐसे एप्लीकेशन है जो छोटे बच्चों को उनकी ओर आकर्षित करते हैं और उनका उपयोग करने के बाद बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। कुछ दिनों पहले भारत सरकार में पब्जी गेम को बैन कर दिया था लेकिन थोड़े ही दिनों बाद बैटलग्राउंड इंडिया का नया पब्जी आ गया। 

यह बिल्कुल सच है कि इन गेमिंग का उपयोग करने वाले छात्र हकीकत में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। कई ऐसे बच्चे हैं जो इनके आदी हो चुके हैं। इस प्रकार के ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया आदि की वजह से आजकल के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई का बहाना करके दिन भर चैटिंग और गेमिंग में लगे रहते हैं। अगर हमारे बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल है तो उसके मोबाइल को हमेशा चेक करते रहना चाहिए। 

बच्चे के मोबाइल में चेक करते समय उसके एप्लीकेशन और उसने कब और कितना समय कहां व्यतीत किया है। इन सब के बारे में जानना हर माता-पिता का कर्तव्य है। अगर बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलानी है तो उसके लिए माता-पिता को ही उसकी हर हरकत पर नजर रखनी होगी। क्योंकि बचपन से ही बच्चा जिस राह पर चलता है, तो वह आगे चल कर भी उसी राह पर चलेगा। 

अगर हम हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं तो उन्हें बुरी लतों से दूर रखना होगा क्योंकि आज के जीवन में शिक्षा के बिना इंसान अधूरा माना जाता है। वर्तमान समय में अनपढ़ इंसान का कोई महत्व नहीं होता है इसीलिए बच्चों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान देना चाहिए। हम सभी भली-भांति जानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों का जीवन कृषि पर टिका हुआ रहता है। ऐसे में उनके बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के लिए नया मोबाइल खरीदना लाभदायक नहीं होगा, क्योंकि बच्चे के माता-पिता सुबह से शाम तक खेतों में लगे रहते हैं। 

इसी बात का बच्चा फायदा उठाता है और मोबाइल का दुरुपयोग करने लगता है। मैं अच्छी तरह से जानता है कि उसके माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं है और ना ही मोबाइल के बारे में जानते हैं। इसलिए वह अपने माता-पिता के सामने सिर्फ पढ़ाई का नाटक करेगा और बाकी समय ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया पर व्यतीत करेगा। आजकल कई ऐसे गेम्स उपलब्ध है जिन्हें खेलने में लगभग हमारे 20 मिनट बर्बाद होते हैं और अगर हमारा बच्चा ऐसे गेम्स को दिन में लगभग 5-6 बार खेलता है तो उसे उसकी आदत पड़ जाती है।

एक दिन की बात है जब मैं अपने गांव गया हुआ था। सुबह मैं खाना खाकर अपने दोस्तों से मिलने घर से निकल गया। मैं पास के ही एक मकान में जाकर बैठ गया था क्योंकि मेरे सभी दोस्त वहां पर मिलने वाले थे। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि पढ़ाई करने की उम्र वाले छात्र एक जगह इकट्ठे होकर अपने अपने मोबाइल में गेम्स खेल रहे थे। मुझे वहां बैठे हुए लगभग 20 मिनट हो गए थे लेकिन उनको मेरे बारे में बिल्कुल नहीं पता नहीं था। सभी बच्चे उस गेम्स को खेलने में पूरी तरह से व्यस्त थे। उस जगह पर मैं कम से कम 2 घंटे तक रुका था, तब तक उन बच्चों के मोबाइल में गेम चलता ही रहा।

थोड़ी देर बाद जब मैंने उनसे पढ़ाई के बारे में पूछा तो उन्होंने मुझसे कहा - अभी छुट्टी चल रही है और स्कूल बंद है। मैंने जवाब दिया - तुम सब ने तो ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदा है लेकिन तुम सब ऑनलाइन गेम खेल रहे हो, क्या इस बारे में तुम्हारे माता-पिता को पता है? तभी एक ने जवाब दिया - आप हमें गेम खेलने दो या यहां से कहीं दूसरी जगह चले जाओ। उन बच्चों की इस बात को सुनकर मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा लेकिन सोचने लगा कि जो पढ़ाई करने वाले छात्र दिन भर इस तरह के गेम खेलेंगे तो भविष्य में पढ़ाई बिल्कुल भी नहीं कर पाएंगे। 

अब आप खुद विचार कीजिए कि जो बच्चे दिनभर इस तरह गेम खेलते हैं। वह जीवन में कभी पढ़ाई नहीं कर सकते। पढ़ाई करने वाली उम्र में ही सोशल मीडिया, गेमिंग, कई घंटों तक व्हाट्सएप, फेसबुक चलाना उनकी लत हो गई है। और यह बिल्कुल सत्य कि ऐसे बच्चों पर मोबाइल के बिना एक पल भी नहीं रहा जाता है। इस प्रकार के बच्चों की सभी लोगों को छुड़ाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल दिलाना तो सही है लेकिन प्रतिदिन उसके मोबाइल को चेक करते रहना चाहिए। 

कई ऐसे बच्चे हैं जिनके पास खुद का मोबाइल फोन है तो मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि वह अपने मोबाइल का सदुपयोग करें। छोटे बच्चों के मोबाइल को हफ्ते में दो-तीन बार चेक करते रहे ताकि हमारा बच्चा ऑनलाइन गेमिंग तथा सोशल मीडिया के चक्कर में बिल्कुल भी ना पड़े और अच्छी पढ़ाई कर सकें। वर्तमान समय में ऑनलाइन पढ़ाई को ही सबसे अधिक महत्व दिया जा रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई करवाने के लिए आजकल हमारे स्कूलों में भी व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। 

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